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Sarfaesi Act

Sarfaesi Act

What to do when a notice is received under the SARFAESI Act?

When a Demand Notice issued under Section 13)2) of the SARFAESI Act, 2002, do not allow your hurt emotions to overtake you, do not lose your equilibrium and turn to despair.  It is normal that the notices are posted by various alternate modes (viz. Registered, Courier, speed-post and courier, simulatenously) to all the borrowers and guarantors by the Bank, just to build pressure.  Don't let the Bank succeed in building undue pressure, the stress is dangerous for health and hampers wisdom in taking independent decisions.

The Notice u/s 13(2) represents the one sided version of the Bank, and may be containing false and baseless or not legally sustainable set of information.  The possibility of concoctted grounds is also there.

Strictly speaking a 13(2) Notice is not a punishment, but necessarily it is an impending threat.

Sit with cool mind and do not hasten in coming up with reaction, do not show your fear to the Bank Officers.  Just calmly recollect the Bank's dealings and collect citations from the corresspondance entertained with the Bank.  Collect the documents to evidence negligence, errors and malicious intention on part of the Bank management.

Precisely, you should prepare your self for the expected possession action by the Bank.  Section 13(4) of the SARFAESI Act confers vast powers to the Authorised Officer.  He can take possession of mortgaged assets and auction those to recover the Banks dues.  But like every powerful creature, he too has certain soft points to hit strategically, being not discussed here as these steps , depending upon circumstances of each individual case are to be exercised with great caution.

To restrain the Bank from lawfully going with  13(4)  You need to take following steps:

i. Recollect from all sources including stretching of your memory to pool all facts, documents and particulars about the "Issues-in-dispute" and have a rough compilation of the material particulars;

ii. Please send copies of material collected by you along with copy of memo / charge sheet to us through email ( or, but only after briefing us over phone;

iii. Based on the material provided and the scheme of our service adopted, we start safeguarding your legitimate interests, saving you from the high-handedness of the Bank(s);

iv.  The 13(2) Notice and the Authorised Oficer appointed by the Bank are to be viewed as a neutral forum.  It provides you 60 days time to present well drafted objections. Your efforts at this stage should be oriented towards making using these proceedings to redeem yourself and to establish your case;  

v.  Practically, it is seen, that in almost all the cases, either the Authorised Officer is not well aware of the provisions of Indian law, not having a legal bent of mind, or working under undue pressure of his bosses in the Bank.   If you feel procedural violations  jeopardising your interest, just bring it to the notice of the Authorised Officer under complaint of grievance to his one step (or more) higher authorities in the Bank, requesting him to record your statement in the SARFAESI proceedings.

vi. The Authorised Officer is required under the law to pass orders whereas the senior Bank authorities to investigate the complaint received. At this stage the matter should rest with that.  There findings may be unfair, but this will provide a good ground to raise dispute at the judicial forum.

v.  The Authorised Officer is rquired to function as quasi-judicial court. You have to bring out your competence and courage in a background of cool mode of calmness and self-confidence.

To handle the matter with more perfectness, let the 'NPA Doctor'handle your case and face the Bank in meetings as well.

Consultant for Sarfaesi Act
For details, may contact at:
mobile: (91)83606-96178  
Timings: 11am to 2pm / 4pm to 7pm
email :

सर्फेसी एक्ट, 2002 के तहत नोटिस प्राप्त होने पर क्या करना है?  

जब धारा 13(2) सर्फेसी एक्ट, 2002 के तहत
जारी की गई डिमांड का नोटिस मिलने पर,
भावना मैं बह कर
अपने संतुलन को न खोएं और
निराशा की ओर रुख न करें।

यह एक सामान्य सी बात है कि बैंक द्वारा

सभी उधारकर्ताओं और गारंटरों को
दबाव बनाने के लिए नोटिस
विभिन्न वैकल्पिक तरीकों (जैसे पंजीकृत,
कूरियर, स्पीड-पोस्ट और कूरियर)
द्वारा पोस्ट किए जाते हैं।

बैंक को अवांछित दबाव बनाने

में सफल न होने दें,
तनाव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है,
और स्वतंत्र निर्णय लेने में
ज्ञान को प्रभावित करता है।

 सर्फेसी एक्ट, दफ़ा 13(2) का नोटिस
बैंक के एक तरफा कार्यवाही
का प्रतिनिधित्व करता है, और इसमें झूठे
व् मन-घडन्त और आधारहीन या कानूनी
रूप से न-टिकाऊ आरोप हो सकते है।

इन आरोपों की काट
कानूनी तर्क की जानकारी के साथ-साथ
सर्फेसी कानून की भी जानकारी
रखने वाला पेशेवर खिलाडी ही कर सकता है
इस तरह की ऑबजेक्शन्स लगाने
के लिए सरफेसी एक्ट के
सैक्शन 13(3-ए) में प्रवधान है

13(2) नोटिस एक सजा नहीं है,
लेकिन जरूरी है कि यह एक आने
वाले खतरे की तरफ संकेत करता है

शांत दिमाग से बैठो और प्रतिक्रिया
में आने की में जल्दी मत करो।
बैंक अधिकारियों को अपना डर ​​

बस बैंक के लेन-देन को
शांत रूप से याद करें और बैंक के साथ
पत्रविहार को कर्मानुसार सुचारु रूप से

एक फाइल में एकत्रित करके,
बिना वक्त गंवाए पेशेवर माहिर
(NPA Doctor) से टाइम लेकर पहुँच जाएँ  

उन से बनवा कर जवाब बैंक को
रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट एवं ईमेल
दोनों माध्यम से ही भेजें और
आगे की कार्यवाही के लिए
उन्हें अनुबंधित कर लें

निश्चित रूप से,
आपको बैंक द्वारा अपेक्षित कब्जे की
कार्रवाई का सामना करने हेतु अपना
पक्ष कानूनी रूप से तैयार रखना चाहिए।

सरफेसी अधिनियम की धारा 13(4)
प्राधिकृत अधिकारी को विशाल
शक्ति प्रदान करती है।
वह अदालत के हस्तक्षेप के बिना 
बंधक संपत्तियों का कब्जा ले 
सकता है और बैंकों की बकाया राशि 
वसूलने के लिए नीलामी कर सकता है। 

लेकिन हर शक्तिशाली प्राणी की तरह, 
उसके पास रणनीतिक रूप से हिट 
करने के लिए कुछ 
नरम बिंदु भी होते हैं।
प्रत्येक व्यक्तिगत मामले की परिस्थितियों के 
आधार पर बहुत सावधानी के साथ 
प्रयोग किया जाना चाहिए।
बैंक को 13(4) के साथ कानूनी रूप से जाने से रोकने के लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है:

I.     "समस्याओं में विवाद" के बारे में सभी तथ्यों, दस्तावेजों और विवरणों को एकत्रित करने के लिए अपनी
याददाश्त पर ज़ोर डालें, सभी स्रोतों से हो चुके 
घटनाक्रम याद  करें और 
सामग्री विवरणों (evidence) का संकलन करें;
   II.     ईमेल ( 
के माध्यम से फोन पर हमें ब्रीफ करने के 
बाद, हमें मेमो / चार्ज शीट की प्रति के 
साथ आपके द्वारा एकत्र की 
गई सामग्री की प्रतियां भेजें;
 III. प्रदान की गई सामग्री और
हमारी सेवा की योजना के आधार पर,
हम आपके वैध हितों की रक्षा
करने का कार्य करना शुरू देते करते हैं,
जो आपको बैंक की मनमानी से बचाते हैं; 
 IV.   13(2) नोटिस और बैंक द्वारा
नियुक्त प्राधिकृत अधिकारी को तटस्थ मंच
के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह आपको अच्छी तरह से तैयार किए गए
आपत्तियों को पेश करने के लिए 60 दिन
का समय प्रदान करता है।
इस चरण में स्वयं के प्रयासों
से खुद को छुड़ाने हेतु और
अपना केस स्थापित करने के लिए
इन कार्यवाही का उपयोग करने के
लिए उन्मुख होना चाहिए;
V.  व्यावहारिक रूप से, यह देखा जाता है 
कि लगभग सभी मामलों में, 
प्राधिकृत अधिकारी का दिमाग 
कानूनी झुकाव के बाहर या 
बैंक में अपने मालिकों के अनुचित दबाव 
के तहत काम करने के नतीजों बारे में 
अच्छी तरह से अवगत नहीं है। 
यदि आप अपनी रुचि को 
खतरे में डालते हुए 
प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को महसूस करते हैं, 
तो उसे बैंक में उच्च अधिकारियों को शिकायत 
के तहत प्राधिकृत-अधिकारी के नोटिस में लाएं, 
जिससे वह सरफेसी कार्यवाही में अपना 
बयान दर्ज करने का अनुरोध कर रही है।
ऐसे मामलों को  'एन.पी.ए. डॉक्टर' 
अधिक पूर्णता से संभालता है और आपकी 
सहायता के लिए मीटिंगों में बैंक 
का सामना करने में भी 
आपकी पूरी सहायता करता है
अपनी कड़ी कमाई की व्यावसायिक 
प्रतिष्ठा को दाँव पर मत लगाओ।
एनपीए खातों में बंधक गिरवी संपत्तियों 
में आपके हितों  की रक्षा के लिए,
सर्फेसी एवं रिकवरी कानूनों प्रक्रियाओं 
की पेचीदगियों में अनुभवी,
एस.बी.आई. (सैमब्रांच) के पूर्व अधिकारी से परामर्श करें।
कानूनी मदद हेतु सम्पर्क करें:
advocate for sarfaesi act
श्री शक्ति  कुमार  जैन
बैंकिंग, क्रेडिट, एन.पी.. समाधान
& सर्फेसी एक्ट के सलाहकार
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया(सैम ब्रांच)
मोबाइल: (91)83606-96178
कॉल करने का समय
सुबह 11 से 2 / बाद दुपहर 4 से 7 बजे तक


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